परिवर्तन कैसे उल्लेखनीय परिवर्तन में बदल जाता है। भारत के इतिहास इतिहास के आइनों से उल्लेखनीय परिवर्तन का तात्पर्य को समझें। खुद के जीवन में कैसे उल्लेखनीय परिवर्तन किया जा सकता है ?
इस लेख के माध्यम से इन्ही सारे सवालों का जबाब ढूंढेंगे।
इतिहास के आइनों से उल्लेखनीय परिवर्तन का तात्पर्य को समझें।
उल्लेखनीय परिवर्तन का तात्पर्य को समझने से पहले परिवर्तन को समझना जरूरी है।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। लेकिन यह हमेशा दृष्टिगोचर नहीं होता। जब तक कि जीवन में या परिस्थितियों में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं हो जाता है।
परिवर्तन जहाँ पोशाक है ,वहीं उल्लेखनीय परिवर्तन शरीर है जहाँ पोशाक शरीर की सुंदरता में चार चाँद लगाते हैं।
मेरे अनुभव के अनुसार परिवर्तन का तात्पर्य है – वैसा नहीं है जैसा था उदहारण के लिए पहले गर्मी का मौसम था अभी ठंडा का मौसम है।अर्थात मौसम बदल गया।
कुछ घंटे पहले खेत में काम करते किसान को आधे अधूरे पोशाक में देखा था। अभी किसी विशेष पार्टी में जाने वाले दुल्है या बाराती की पोशाक में है। अर्थात समय बदल गया है। इन परिस्थितियों को देखें तो पता लगेगा की सिर्फ पोशाक बदला है शरीर नहीं। ये किसान फिर उसी पोशाक में मिल सकता है जब खेत में काम कर रहा होगा।
यही किसान का शरीर जब जब बुढ़ापा में बदल जायेगा तो फिर उसी जवानी की अवस्था में नही जा सकता। यही परिवर्तन उल्लेखनीय परिवर्तन कहलाता है।
अर्थात उल्लेखनीय परिवर्तन वह है जिसके बाद वापसी का रास्ता बंद हो जाए, जो समाज की सोच और जीने का ढंग बदल दे।
जब कोई बदलाव इतना बड़ा, गहरा और ज़िम्मेदार होता है कि
हमारी सोच, हमारी जिंदगी और हमारा भविष्य बदल दे
यह परिवर्तन किसी व्यक्ति का, किसी समाज का, किसी प्रदेश का, या पूरी दुनिया का
हो सकता है।
Table of Contents
भारत के संदर्भ में उल्लेखनीय परिवर्तन
वैदिक युग में बौद्ध और जैन धर्म के द्वारा उल्लेखनीय परिवर्तन
वैदिक युग में बुद्ध और जैन धर्म द्वारा लाया गया उल्लेखनीय परिवर्तन में यज्ञ, कर्मकांड, ब्राह्मणों का प्रभुत्व और जातिगत जटिलताएं और धार्मिक नहीं था बल्कि मानव केंद्रित सोच, नैतिक आचरण और समानता आधारित समाज की नींव रखनेवाला था। परिणामस्वरूप भारत का स्वर्णिम युग देखने को मिला। आज भी उस स्तर पर पहुंच नहीं पाया है। भले ही आज के समाज का स्वरूप बदला हो लेकिन विचार नहीं बदला है।
भारत में इस्लामिक शासन और अंग्रेजी उपनिवेशवाद के दौरान हुए उल्लेखनीय परिवर्तन नकारात्मक रहा क्योंकि
- इस्लामिक शासन और विशेषकर अंग्रेजों ने लूटा विनाशकारी आर्थिक नीति अपनाकर सबसे पहले दोनों ने भारत को सोने के पिंजरा को लूटकर दीनहीन कंगाल बना दिया ।
- इन लोगों ने राजनीतिक दमनकारी नीति अपनाई और भारतीय शासन को तहस नहस कर दिया।
- इनलोगों ने वैचारिक रूप से भारतीय समाज को आत्महीन कर सामाजिक रूप से विभाजनकारी नीति अपनाई।
ये परिवर्तन भारत को कई सौ साल पीछे कर दिया।
स्वतंत्रता आंदोलन (1857- 1947)
औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन से मुक्त होकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र बनने तक का उल्लेखनीय परिवर्तन का सफर केवल सत्ता का परिवर्तन नहीं था ।
बल्कि मन की आजादी और और आत्म गौरव का था।
हरित क्रान्ति – हरित क्रांति ने भारत में खाद बीज और तकनीक से भोजन उत्पादन बढ़ाकर भोजन की उपलब्धता के मामले में काफी हद तक आत्म निर्भर बनाया।
उदारीकरण नीति 1991 की –
आजादी के बाद फूंक फूंक कर कदम रखने से भारत की हालत बिल्कुल खस्ताहाल हो गया । अस्तित्व का संकट के बादल गहराने लगे तब भारत ने उदारीकरण की नीति को अपनाकर अपने दरवाजे दुनिया के लिए खोले। दुनियाभर के निवेशक को निवेश, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में मौका दिया। इसके कारण हमारी सोच, नीति और व्यवहारों में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ।
भारत में डिजिटल क्रांति
यह उल्लेखनीय परिवर्तन कभी सुनामी की तरह अचानक होगा लेकिन इसका असर दीर्घकालिक होता है।जैसे जिओ रिलायंस ने call का मूल्य जीरो करके डाटा भी फ्री कर दिया था। परिणाम इंडिया में डिजिटल क्रांति आ गयी देश के आम नागरिक भी इस जद में आ गया। और आज पूरा देश डिजिटलिज़्ड होने की ठान लिया है। और आगे रोबोटिक युग में प्रवेश करने की और कदम बढ़ा रहा है।
आज हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन है,
आज देश के अधिकांश हिस्सा में इंटरनेट उपलब्ध है।
ज्ञान हासिल करना देश के हर व्यक्ति के पहुंच में है।
करोड़ों लोग घर बैठे skill बढ़ा रहे हैं जैसे कि मैं ब्लॉग और सोशल मीडिया पर काम सीख रहा हूं।
और घर बैठे लोग काम भी कर रहे हैं।
यह उल्लेखनीय परिवर्तन हिमगिरि से शनैः शनैः पिघलने वाली बर्फ से पानी की तरह भी हो सकता है। जैसे शिक्षा में सुधार आज भी शनैः शनैः ही हो रहा जिस कारण इंडिया मात्र विकासशील देश है जो विकसित होने को तड़प रहा है। ये तभी संभव होगा जब देश के हर पीढ़ी साक्षर नहीं शिक्षित हो।
डिजिटल क्रांति से देश के सभी नागरिकों तक किसी भी सेवाओं के द्वारा शिक्षा के साथ साथ कई अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन संभव और आसान है।
डिजिटल क्रांति से आपके जीवन में भी उल्लेखनीय परिवर्तन संभव है। जरूरत है खुद को अनुशासित करते हुए दृढ़ संकल्प पैदा करने की ताकि अपने संकोच को दूर कर खुद का कायाकल्प कर सकें।
व्यक्ति के जीवन में सम्भावित उल्लेखनीय परिवर्तन
🔹 1. आज के दौर में व्यक्ति को सोच में बदलाव लाना जरूरी है। खुद के अंदर संकोच को ख़त्म करके समाधान आधारित चिंतन सोच विकसित करनी होगी।
क्योंकि जब व्यक्ति मौका नहीं ढूँढता —
solution अपने भीतर ढूँढता है। तो अपने अनुकूल परिस्थितियां का निर्माण कर सकती है।
🔹 2. लचीलापन (Flexibility)
आज वही टिकता है जो सीखता है, खुद को परिस्थितियों के अनुकूल करता है और अपने तरीके बदलता है ।
🔹 3. लगातार कौशल विकास
एक स्किल नहीं, कई स्किल जैसे डिजिटल स्किल, व्यवहारिक स्किल और निर्णय-लेने की स्किल को विकसित करना होगा।
🔹 4. सम्मानित नेटवर्क (संबंधों) की शक्ति
आज सिर्फ़ रिश्ते नहीं, संदर्भ, अवसर ,सलाह को भी वरीयता देना जरूरी है।
ये सब मिलाकर ही व्यक्ति का मूल समर्थन बनाते हैं।
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व्यक्ति के भविष्य में संभावित परिवर्तन क्या हो सकता है।
सफलता के नए मार्ग बनेंगे। नौकरी से स्वयं निर्मित व्यवसाय की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। Online learning से ग्लोबल reach बढ़ेगी।कम संसाधन में भी अधिक उत्पादन कर सकते हैं। परिणामस्वरूप community driven growth संभावना बढ़ती चली जाएगी।
निष्कर्ष
उल्लेखनीय परिवर्तन
यानि वह बदलाव जो स्मॉल से शुरू हो कर लैज़र की तरह सीधा लक्ष्य को छू ले:
परिवर्तन की प्रक्रिया केवल बदलाव नहीं है,
बल्कि बेहतर होने की यात्रा है।
ये आपके दृढ़ संकल्प और अनुशासनिक परिवर्तन के द्वारा ही संभव है।
उल्लेखनीय परिवर्तन का तात्पर्य क्या है ?
उल्लेखनीय परिवर्तन वह है जिसके बाद वापसी का रास्ता बंद हो जाए, जो समाज की सोच और जीने का ढंग बदल दे।
जब कोई बदलाव इतना बड़ा, गहरा और ज़िम्मेदार होता है कि
हमारी सोच, हमारी जिंदगी और हमारा भविष्य बदल दे ।
यानि वह बदलाव जो स्मॉल से शुरू हो कर लैज़र की तरह सीधा लक्ष्य को छू ले ।
यह परिवर्तन किसी व्यक्ति का, किसी समाज का, किसी प्रदेश का, या पूरी दुनिया का
हो सकता है।
उल्लेखनीय कार्य क्या है ?उदहारण देकर समझाएं।
परिस्थियों से उत्पन्न समस्या का बेहतर समाधान खोजना जो अपेक्षाओं के स्तर से भी जयदा उत्कृष्ट हो। जैसे एक टीचर के पास बच्चे प्रश्न लेकर जाता है। टीचर बस उसे समझा देता है। इस तरह से प्रश्न हल कर लो।
उसी समस्या को लेकर बच्चा दूसरे टीचर के पास जाता है और टीचर इस तरह से उदहारण देकर बच्चे को समझाता है की बच्चे फिर उस समस्या को आसानी से हल कर लेता है। बचा गदगद हो जाता है। ये बच्चों के दृष्टिकोण से उल्लेखनीय कार्य कहलाता है।