आप जो खुली आँखों से सपने देख रहे हैं उसे यथार्थ में बदलने के लिए दृढ संकल्प को कैसे विकसित करें ये सीखना होगा। क्योंकि दृढ संकल्प के सूत्र को समझे बिना सपने को यथार्थ में बदल ही नहीं सकते हैं। या कहे की दृढ संकल्प के बिना किसी भी लक्ष्य प्राप्त करना संभव ही नहीं है।
इस लेख के माध्यम से समझेंगे की सफलता के उच्च शिखर को छूने वाले लोग दृढ संकल्प को विकसित कैसे करते हैं।ये भी बताऊंगा कि मेरा दृढ संकल्प कैसे विकसित हो रहा है।
दृढ़ संकल्प को प्रभावित करने वाले 8 कारक क्या है ?
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दृढ़ संकल्प को प्रभावित करने वाले 8 कारक क्या है ?
दृढ़ संकल्प (Willpower या Determination) किसी भी व्यक्ति की सफलता का मूल आधार होता है।
यह वह आंतरिक शक्ति है जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर टिके रहने की क्षमता देती है ।
हालांकि दृढ़ संकल्प कोई स्थायी गुण नहीं है, बल्कि यह कई आंतरिक और बाहरी कारकों से प्रभावित होता रहता है।
नीचे ऐसे प्रमुख कारकों का विस्तृत वर्णन किया गया है
जो किसी व्यक्ति के दृढ़ संकल्प को मजबूत या कमजोर बना सकते हैं।
1. मानसिक स्थिति और आत्मविश्वास
व्यक्ति की मानसिक स्थिति दृढ़ संकल्प का सबसे बड़ा आधार होती है।
सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और स्वयं पर विश्वास होने से व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी डटा रहता है।
इसके विपरीत, नकारात्मक सोच, भय और आत्म-संदेह दृढ़ संकल्प को कमजोर कर देते हैं।
जब व्यक्ति खुद को अयोग्य समझने लगता है, तो उसका संकल्प भी धीरे-धीरे टूटने लगता है।
इसके साथ ही खुद, ही खुद के अस्तित्व पर संदेह होने लगता है।
जिसके कारण मानसिक स्थिति और आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है।
इसे मजबूत करने के लिए अनुशासन के महत्व को फॉलो करना होगा परिणामस्वरूप दृढ संकल्प धीरे -धीरे मजबूत होने लगेगा।
2. लक्ष्य की स्पष्टता
स्पष्ट और निश्चित लक्ष्य दृढ़ संकल्प को मजबूत बनाते हैं। जब व्यक्ति जानता है कि उसे क्या प्राप्त करना है और क्यों करना है,
तब उसके भीतर निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा बनी रहती है। अस्पष्ट या बार-बार बदलने वाले लक्ष्य व्यक्ति को भ्रमित करते हैं, जिससे उसका संकल्प कमजोर पड़ जाता है।
3. अनुशासन और आदतें
अनुशासन दृढ़ संकल्प का व्यवहारिक रूप है।
नियमित दिनचर्या, समय प्रबंधन और सही आदतें व्यक्ति को लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने में मदद करती हैं।
आलस्य, टालमटोल और अव्यवस्थित जीवनशैली दृढ़ संकल्प को धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं।
4. शारीरिक स्वास्थ्य और ऊर्जा
स्वस्थ शरीर में ही मजबूत संकल्प विकसित होता है।
पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से मानसिक ऊर्जा बनी रहती है।
जब शरीर थका हुआ या बीमार रहता है, तब मन भी कमजोर पड़ता है संकोच की भावना बढ़ने लगती है और व्यक्ति आसानी से हार मान लेता है।
5. भावनात्मक नियंत्रण
क्रोध, भय, निराशा और तनाव जैसे भावनात्मक तत्व दृढ़ संकल्प को प्रभावित करते हैं।
जो व्यक्ति अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीख लेता है, वह कठिन समय में भी सही निर्णय ले पाता है।
भावनात्मक असंतुलन और संकोच व्यक्ति को लक्ष्य से भटका सकता है।
6. सामाजिक वातावरण
परिवार, मित्र और समाज का प्रभाव भी दृढ़ संकल्प पर पड़ता है।
सकारात्मक, सहयोगी और प्रेरणादायक वातावरण व्यक्ति के संकल्प को मजबूत करता है।
वहीं नकारात्मक आलोचना, तुलना और हतोत्साहन व्यक्ति के आत्मबल को कमजोर कर देते हैं।
7. असफलताओं का अनुभव
असफलता दृढ़ संकल्प को या तो तोड़ती है या और मजबूत बनाती है—यह व्यक्ति की सोच पर निर्भर करता है।
जो व्यक्ति असफलता को सीख मानता है, उसका संकल्प और मजबूत होता है।
वहीं जो व्यक्ति असफलता से डर जाता है,दरअसल संकोच की भावना बढ़ने लगती है
जिसके कारण उसका आत्मविश्वास और संकल्प दोनों कमजोर हो जाते हैं।
8. आत्म-प्रेरणा और उद्देश्य
जब व्यक्ति का कोई बड़ा उद्देश्य या जीवन का अर्थ होता है, तब उसका दृढ़ संकल्प स्वतः मजबूत हो जाता है।
आंतरिक प्रेरणा बाहरी पुरस्कारों की तुलना में अधिक स्थायी होती है।
दृढ़ संकल्प के बिना जीवन क्यों अधूरा है?
आप सपने देख रहे हैं कि हमें अमुक लक्ष्य प्राप्त करना है लेकिन दृढ संकल्प के बारे में सोचा ही नहीं
चूँकि आपका दृढ संकल्प मजबूत नहीं है तो आपके लाइफ में अनुशासन नहीं होगा
जिसके कारण लक्ष्य कभी साकार होगा नहीं क्योंकि लक्ष्य अधूरा रह जाता है
यदि आपने लक्ष्य तय कर लिया लेकिन दृढ संकल्प विकसित नहीं है
तो आपके मन में ये बातें चलेगी हमसे होगा की नहीं ,कर पाएंगे की नहीं करें की नहीं
यदि नहीं कर पाएंगे तो लोग क्या कहेंगे इस तरह खुद पर साँसेह होगा
क्योंकि ऐसी हालत में मन भटकता है।
जब आप दृढ संकल्प विकसित नहीं किये होते हैं तो किसी भी काम को बेतरतीब तरीके से करते हैं ।
जिसके कारण तय लक्ष्य को पूरा होने के सम्भावना काम हो जाती है ।
परिणामस्वरूप सफलता के अवसर काम हो जाते हैं।
क्योंकि आत्मविश्वास कमजोर होता है
जब आपका दृढ संकल्प मजबूत नहीं होता है तो
अपने लक्ष्य पर काम करने के बजाए तकाल परिस्थितियों से उत्पन्न गैर जरूरी कार्य को करना ज्यादा पसंद करते हैं।
यानि की परिस्थजियां आपको नियंत्रण करने लगती है। और आप लक्ष्य से भटक जाते हैं।
दृढ़ संकल्प जीवन में दिशा, गति और ऊर्जा देता है।
दृढ़ संकल्प कैसे विकसित करें? ( 5 प्रैक्टिकल टिप्स)
दृढ़ संकल्प कोई जादू नहीं है, जिसे एक रात में सीखा जा सके। इसे रोज़ अभ्यास से मजबूत किया जाता है, जैसे आप अपनी मांसपेशियों को मजबूत करते हैं।
यदि आप गभीरता से दृढ संकल्प विकसित करना चाहते हैं तो सबसे पहले एक ऐसी आदत विकसित करें जिसे आप आसानी से प्रतिदिन जारी रख सकते हैं।
उदहारण के तौर पर आप कहीं से भी घर आएं तो अपने चप्पल या जूता को सजाकर या सहेजकर रखें और कहीं भी जाने से पहले उसे एक बार साफ़ जरूर कर लें।
मैं अपने दृढ संकल्प को इसी तरह विकसित किया।
एक बार जब ये आदत स्वचालित हो जाये तो दूसरी आसान आदत को विकसित जिसे आप करना चाहते हैं।
इसी तरह आपका दृढ संकल्प मजबूत होता रहेगा और आप कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त करने लगेंगे।
1. एक ‘छोटा लक्ष्य’ बनाओ (Start with a Small Target)
किसी भी बड़े काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट लो।
- उदाहरण: अगर आपको पूरी किताब पढ़नी है, तो कहो, “आज मैं बस 5 पन्ने पढ़ूँगा।”
- कैसे मदद करता है: जब आप छोटे लक्ष्य पूरे करते हैं, तो आपको सफलता का स्वाद मिलता है, जिससे आपको अगले बड़े लक्ष्य को पूरा करने की प्रेरणा और दृढ़ता मिलती है।
मेरी कहानी से समझ सकते हैं।
बचपन से कुछ साल पहले तक दृढ संकल्प नाम की कोई चीज मेरे व्यवहार या आदत में शामिल ही नहीं था।
हालाँकि कुछ न कुछ करता ही था लेकिन जीवन में दृढ संकल्प के अभाव में कभी बड़ी सफलता को हासिल नहीं कर पाया हूँ।
किन्तु जब से “प्रकृति को जानो” किताब को पढ़ा तो उसमे बताई एक साधारण आदत को फॉलो किया।
आदत कुछ इस प्रकार काठ कि प्रत्येक दिन कहीं से भी घर आने पर अपने चप्पल या जूता को सहेजकर रखना और कहीं भी जाते समय साफ़ करके पहनना।
इसमें आज तक सफल हूँ।
इसके बिना प्याज लहसुन के भोजन शुरू किया इसके परिवार और समाज के लोगों का विरोध या तना भी सुनना पड़ा।
लेकिन आज तक सफलतापूर्वक इस दृढ संकल्प पर अडिग हूँ।
इसी तरह और कई आदतों को जारी रखकर दृढ संकल्प को विकसित कर रहा हूँ।
जरुरी नहीं है कि आप भी इसी आदत से दृढ संकल्प विकसित करें।
आप किसी अन्य जरुरी आदत से शुरू करके अपने दृढ संकल्प को विकसित करें।
2. कछुए की चाल चलो (Be Like the Tortoise)
तेज़ होना ज़रूरी नहीं है, लगातार होना ज़रूरी है।
- उदाहरण: रोज़ 10 मिनट पढ़ने वाला बच्चा, एक दिन भी न पढ़ने वाले बच्चे से ज़्यादा सीखेगा।
- कैसे मदद करता है: जब हम धीरे लेकिन लगातार चलते हैं, तो हमारा दिमाग थकता नहीं है और हम बीच में काम छोड़ते नहीं हैं। याद रखो, कहानी में कछुआ ही जीता था!
3. मुश्किलों से दोस्ती करो (Befriend the Challenges)
जब कोई काम मुश्किल लगे, तो उसे रुकावट मत समझो, उसे चुनौती समझो।
- उदाहरण: अगर आपकी ड्राइंग अच्छी नहीं बन रही है, तो यह मत कहो “मैं नहीं कर सकता।” कहो, “यह मुश्किल है, मुझे इसे सीखने के लिए एक और तरीका खोजना होगा!”
- कैसे मदद करता है: दृढ़ संकल्प हमें सिखाता है कि गलतियाँ हमें यह बताती हैं कि हमें आगे क्या सुधारना है, न कि यह कि हमें रुक जाना चाहिए।
4. अपने ‘क्यों’ को याद रखो (Remember Your “Why”)
आपने वह काम क्यों शुरू किया था? अपने उस उद्देश्य को हमेशा याद रखो।
- उदाहरण: यदि आपने सुबह जल्दी उठने का फैसला किया है ताकि आप अपने दादा-दादी के साथ खेल सकें, तो जब अलार्म बजे तो उस खेलने के सुख को याद करो।
- कैसे मदद करता है: जब मन भटकता है, तो कारण (Why) को याद करने से हमें वह ऊर्जा मिलती है जो हमें वापस रास्ते पर लाती है।
5. छोटी सफलताओं का जश्न मनाओ (Celebrate Small Wins)
=जब आप अपना छोटा लक्ष्य पूरा कर लेते हैं, तो खुद को शाबाशी दो।
- उदाहरण: 5 पन्ने पढ़ने के बाद खुद को 5 मिनट का ब्रेक दो, या अपने पसंदीदा स्टिकर को अपनी डायरी में लगाओ।
- कैसे मदद करता है: यह आपके दिमाग को सिखाता है कि मेहनत करने का अच्छा फल मिलता है, जिससे वह बार-बार दृढ़ संकल्प के साथ काम करने के लिए प्रेरित होता है। यह सकारात्मक आदत को मजबूत करता है।
बच्चों को दृढ़ संकल्प क्यों चाहिए?
आत्मविश्वास (Self-Confidence) के निर्माण के लिए
दृढ संकल्प से कार्य करने पर बच्चा जब किसी काम को पूरा करता है, तो उसे अपनी क्षमताओं पर भरोसा होने लगता है। अपनी मेहनत से उसे हासिल करता है, तो उसके भीतर ‘मैं यह कर सकता हूँ’ का भाव पैदा होता है मुश्किलों से डरने के बजाय सामना करना सीखते हैं जिसके कारन बच्चा में आत्मविश्वास और self belief बढ़ता है।
अनुशासन और चरित्र निर्माण के लिए
दृढ़ संकल्प बच्चों के भीतर आत्म-अनुशासन (Self-discipline) पैदा करता है। यह उन्हें सही और गलत के बीच चुनाव करने और कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों पर अडिग रहने की शक्ति देता है। यह गुण उन्हें एक जिम्मेदार और मजबूत व्यक्तित्व वाला इंसान बनाता है।
ध्यान केंद्रित करने और एकाग्रता के लिए (Focus & Concentration)
डिजिटल युग के सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण ध्यान भटकना बहुत आसान है। दृढ़ संकल्प बच्चों को उनके लक्ष्यों (जैसे होमवर्क पूरा करना या किसी खेल का अभ्यास करना) पर टिके रहने में मदद करता है। यह उन्हें बाहरी विकर्षणों (Distractions) को नजरअंदाज करना सिखाता है।
धैर्य और आत्मनियंत्रण विकसित करता है
मनोविज्ञान के अनुसार, जो बच्चे तुरंत इनाम की चाहत न रखकर अपने लक्ष्य के लिए लंबा इंतजार कर सकते हैं, वे भविष्य में ज्यादा सफल होते हैं। दृढ़ संकल्प बच्चों को यह समझाता है कि बड़ी सफलता पाने के लिए निरंतर मेहनत और धैर्य की आवश्यकता होती है।
भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करता है
जीवन में हर चीज़ आसान नहीं होती।लेकिन एक बार जब बच्चा समझ लेता हम दृढ संकल्प के दम पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। दरअसल यही चीज भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करता है। दृढ़ संकल्प बच्चों को जिम्मेदार, मजबूत और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
बच्चों में दृढ़ संकल्प विकसित करने के 5 आसान तरीके क्या है ?
तरीका 1: छोटे-छोटे लक्ष्य बनाओ (Small Goals)
च्चों में दृढ संकल्प विकसित करवाने के लिए एक ऐसी आदत के बारे में बताइये
फिर आदत से होनेवाला फायदा और न करने से क्या नुक्सान होगा उसे समझाइये जिसे वह आसानी से समझ सके।
जब तक बच्चा उस आदत को स्वचालित ढंग न करने लगे उसे याद दिलाते रहना चाहिए।
एक बार बच्चा किसी भी छोटा लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है।
तो फिर उसे दूसरा आदत को विक्स्ट करने में सहायता कीजिये।
इस तह कुछ ही सैलून में बच्चा कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकता है।
तरीका 2: “मैं कर सकता हूँ” वाला वाक्य दोहराना (Positive Self-talk)
सुबह उठकर बच्चों के साथ यदि मैं कर सकता हूँ वाक्य को दोहराते हैं।
तो इससे न केवल बच्चों का Belief system तैयार होता है साथ ही साथ उसका आत्मविश्वास भी बढ़ने लगता है।
और इससे आपके अंदर भी आत्मविश्वास के साथ दृढ संकल्प विकसित होगा।
तरीका 3: काम आधा छोड़ना नहीं (Finish What You Start)
जब भी बच्चा किसी काम को कर रहा होता है।
बीच में छोटी सी मुश्किल आने पर काम को अधूरा छोड़ना चाहता है ,उस समय बच्छों को काम पूरा करने में यदि सहयोग करते हैं।
जिसके कारण काम पूरा हो जाता है तो बच्चा को हौसला बढ़ता है।
इस तरह काम को बीच में छोड़ने की प्रवृति घटने लगती है।
तरीका 4: गलतियों को दुश्मन नहीं, दोस्त समझें (Learn From Mistakes)
बच्चा जब भी किसी काम को कर रहा होता उस दौरान उससे उससे गलतियां भी होती है ,
जिसके कारण बच्चा यदि काम को अधूरा छोड़ना चाहे तो उस समय बच्चे को उत्साह बढ़ाइए।
बच्चे को बताइये आप जिस तरीके से आप कर रहे हैं वो तरीका काम नहीं करता है ,
तो दूसरा तरीका आजमाओ अर्थात गलतियों को दुश्मन नहीं दोस्त समझो जब तक की काम पूरा न हो जाये।
जब एकबार बच्चा काम को पूरा कर लेता है तो फिर बच्चा Experiment करने से हिचकता नहीं है।
फिर कार्य कॉ पूरा करना आसान हो जाता है।
तरीका 5: एक ‘संकल्प डायरी’ बनाना (Daily Habit )
बच्चा जब भी किसी कार्य को करे उसे एक संकल्प डायरी में लिखना सिखाइये।
बच्चों को कहें कि आज के तारीख में इसे डायरी में लिख लो
क्योंकि जब कभी किसी कार्य को करना मुश्किल लगे इस डायरी को देखकर हौसला बढ़ जायेगा
फिर आपको काम में समस्या आने के बाद भी काम को पूरा करने से पीछा नहीं हटेंगे।
निष्कर्ष
नकिसी भी बच्चे या व्यक्ति में दृढ संकल्प तभी विकसित होगी
जब दृढ संकल्प विकसित करने की प्रक्रिया को अपनाये।
ये एक धीमा प्रक्रिया है
क्योंकि इसके लिए आदत पर काम करना होता है।
इसकी शुरुआत एक छोटी आदत से होनी चाहिए।
जैसे जैसे आदत स्वचालित होने लगती है दृढ संकल्प भी मजबूत हो रहा होता है।
इससे हमारे दिमाग से डोपामाइन रिलीज़ होता है और इस तरह से Belief system में दृढ संकल्प से काम करना अंदर कर जाता है।
जैसे जैसे दृढ संकल्प मजबूत होगा वैसे वैसे तय किये लक्ष्य को कठिन परिस्थियों में भी पूरा करना आसान होता जायेगा।
बच्चों को दृढ़ संकल्प क्यों चाहिए?
दृढ संकल्प से कार्य करने पर बच्चा जब किसी काम को पूरा करता है, तो उसे अपनी क्षमताओं पर भरोसा होने लगता है। अपनी मेहनत से उसे हासिल करता है, तो उसके भीतर ‘मैं यह कर सकता हूँ’ का भाव पैदा होता है मुश्किलों से डरने के बजाय सामना करना सीखते हैं जिसके कारन बच्चा में आत्मविश्वास और self belief बढ़ता है।