स्वाभाविक का अर्थ और परिचय
स्वाभाविक का अर्थ और स्वाभाविक प्रवृति का अर्थ क्या है और मनोवैज्ञानिक रहस्य तथा प्रभाव जानने से पहले स्वाभाविक शब्द को स्वाभाविक ढंग से समझने की जरूरत है।
अक्सर हमलोग बातचीत के दौरान कहते हैं कि उसका ऐसा बोलना या करना स्वाभाविक था क्योंकि यह उसका मूल चरित्र या असली आंतरिक स्थिति को दर्शाता है।
हमारे रोज़मर्रा के जीवन में दो शब्द बहुत बार सुनाई देते हैं – “स्वाभाविक” और “स्वाभाविक प्रवृत्ति”।
ये शब्द केवल भाषा के हिस्से नहीं हैं, बल्कि मानव व्यवहार, प्रकृति के नियमों और मनोविज्ञान की गहराई को समझाने में मदद करते हैं।
आइए इन दोनों की सही और गहन समझ विकसित करें, ताकि हम इन्हें केवल इस्तेमाल न करें, बल्कि जीवन में उचित परिस्थिति और सही संदर्भ में लागू भी कर सकें।
स्वाभाविक शब्द संस्कृत के मूल शब्द स्वाभाव से बना है।
स्वाभाव दो शब्द के मेल से बना है – स्व+भाव = स्व अर्थात स्वयं या अपना , भाव अर्थात नैसर्गिक विचारों की प्रकृति
यानि स्वयं का नैसर्गिक विचारों की प्रकृति इसे अन्य शब्दों में जो अपने अस्तित्व या मूल प्रकृति से उत्पन्न हो ,
जिसमे व्यक्ति को कोई प्रयास ना करना पड़े या जो स्वतः हो कोई बाहरी हस्तक्षेप के बिना हो।
इसे प्राकृतिक , नैसर्गिक , सहज ,और कुदरती भी कह सकते हैं। जो बनाबटी या कृतिम जैसा न दिखे।
Table of Contents
स्वाभाविक का अर्थ(Meaning of Swabhavik) क्या है ?
कोई भी ऐसी क्रिया या स्थिति जो बाहरी दबाव, लालच या डर के बिना,जिसमे अनुशासन की आवश्यकता नहीं बल्कि व्यक्ति के अंतर्मन से स्वतः स्फूर्त होती है, उसे ‘स्वाभाविक’ कहा जाता है।
उदाहरण: 1.जैसे पानी का स्वभाव शीतल होना है और अग्नि का स्वभाव उष्ण (गर्म) होना है। वैसे ही मनुष्य का बिना किसी प्रयास के खुश होना या करुणा या दया दिखाना उसका स्वाभाविक गुण है।
2. बच्चे का हँसना और रोना और दूध पीना स्वाभाविक होता है। यह सीखा हुआ नहीं, जन्मजात है।इसके लिए संकोच नहीं करता है।
3. किसी का बिना डर के सच बोलना और खेलना स्वाभाविक व्यवहार कहलाता है।
छोटी सी कहानी है -एक दिन की बात है कोई बाहरी व्यक्ति हमारे ममेरा भाई को खोजने आया तो परिवार के लोगों ने कुछ संदेह होने के कारण बोले की नहीं है ,
लेकिन वहीँ मेरी 4 साल की बेटी ने कह दिया कि हाँ है। इस पर सभी लोगों ने प्रतिक्रिया की बच्ची ने स्वाभाविक रूप से सच बताया।
4. पेड़ों का हवा में हिलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
5. हर जीव का साँस लेना स्वाभाविक प्रक्रिया है।
तथ्य: मनोविज्ञान में इसे “innate” या “natural” कहा जाता है, जबकि दर्शनशास्त्र (विशेषकर भारतीय) में “स्वाभाविक” को “स्वभाव से सिद्ध” माना जाता है, जो बिना प्रयास के विद्यमान रहता है।
स्वाभाविक के पर्यायवाची शब्द –
प्राकृतिक, सहज, बनवाटरहित , नैसर्गिक , कुदरती , स्वतः , बिना किसी प्रयास या दबाब के प्रतिक्रिया
स्वाभाविक प्रवृति का अर्थ (Meaning of Natural Instinct / Innate Tendency)या मतलब क्या है ?
मनोवैज्ञानिक अर्थ: यह एक ऐसी जन्मजात प्रेरणा है जो हमें किसी विशेष परिस्थिति में एक निश्चित तरीके से प्रतिक्रिया करने के लिए मजबूर करती है। इसके लिए हमें किसी शिक्षा या ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती।
तथ्य: इसे ‘Biological Programming’ भी कह सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई खतरा सामने आता है, तो बिना सोचे-समझे भागना या मुकाबला करना (Fight or Flight) हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति है।
स्वाभाविक प्रव्रृति का अर्थ या मतलब किसी व्यक्ति या जीव के अंदर जन्म से या स्वभाव से मौजूद प्राकृतिक झुकाव या आदत।
स्वाभाविक प्रवृत्ति की विशेषताएँ क्या है ?
अपरिवर्तनीयता (Unchangeable): शिक्षा से व्यवहार बदला जा सकता है, लेकिन मूल ‘स्वाभाविक प्रवृत्ति’ को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।
यह बीज की तरह हमारे अवचेतन मन में रहती है।
बिना प्रयास के (Effortless): स्वाभाविक क्रियाओं में थकान नहीं होती।
अगर आप किसी की मदद ‘दिखावे’ के लिए कर रहे हैं, तो आप थक जाएंगे,
लेकिन अगर यह आपकी ‘स्वाभाविक प्रवृत्ति’ है, तो आपको आनंद मिलेगा।
यूनिवर्सल (Universal): कुछ प्रवृत्तियाँ पूरी मानव जाति में एक समान होती हैं, जैसे माँ का बच्चे के प्रति प्रेम या भूख लगने पर भोजन की तलाश।
जानवरों में शिकार करना या खाने के भोजन तलाश करना उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति मानी जाती है।
जन्मजात (inborn) और आनुवंशिक रूप से निर्धारित होता है।
बिना सोचे-समझे, स्वचालित रूप से सक्रिय होता है।
प्रजाति के लगभग सभी सदस्यों में समान रूप से पाया जाता है।
सीखने की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं, हालांकि अनुभव से थोड़ा संशोधित हो सकता है।
कुछ स्वाभाविक प्रमाणित उदाहरण:
नवजात शिशु का माँ का दूध पीने के लिए मुँह खोलना और चूसने की क्रिया – स्वाभाविक प्रवृत्ति (Rooting & Sucking Reflex)
पक्षियों का घोंसला बनाना – कोई सिखाता नहीं, फिर भी जटिल डिज़ाइन में बनाते हैं
मनुष्य में खतरे से बचने की प्रवृत्ति (Fight or Flight response) –एड्रेनलिन का तुरंत स्राव होता है।
मधुमक्खियों का नृत्य करके दिशा बताना – पूरी तरह जन्मजात होती है।
समुद्री कछुओं का अंडे से निकलते ही समुद्र की ओर – बिना किसी ट्रेनिंग के चलना
तथ्य: अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “The Expression of the Emotions in Man and Animals” में
चार्ल्स डार्विन ने इंसानों में भी कई स्वाभाविक प्रवृत्तियों का वर्णन किया है, जैसे डर , गुस्सा , और देखभाल(caretaker) की प्रवृत्ति।
आधुनिक न्यूरोसाइंस में पाया गया है कि ये व्यवहार ब्रेन के मुख्य हिस्सों (limbic system और brainstem) से नियंत्रित होते हैं।
स्वाभाव और स्वाभाविक दोनों में अंतर और संबंध
विशेषता, स्वाभाविक, स्वाभाविक प्रवृत्ति
अर्थ “मूल प्रकृति से जुड़ा, सहज”, जन्मजात व्यवहार की दिशा/झुकाव
स्तर सामान्य गुण/प्रकृति विशिष्ट क्रिया/प्रतिक्रिया
दायरा किसी कार्य या प्रतिक्रिया पर लागू व्यक्ति के स्वाभाव पर लागू
उदहारण स्वाभाविक मुस्कान दयालु होना स्वाभाविक प्रवृति है
क्षेत्र. दर्शन, भाषा, व्यक्तित्व. मनोविज्ञान / जीवविज्ञान /Ethology
सीखने की आवश्यकता नहीं नहीं (या बहुत कम)
मनोविज्ञान में स्वाभाविक प्रकृति का क्या महत्व है ?
मनोविज्ञान के अनुसार हर व्यक्ति कुछ न कुछ प्राकृतिक प्रवृत्तियों के साथ जन्म लेता है।
जैसे – जिज्ञासा ,डर, अपनापन, आत्मरक्षा की भावना
उदाहरण के लिए, Sigmund Freud ने मानव प्रवृत्तियों को समझने में अवचेतन मन (unconscious mind) की भूमिका पर ज़ोर दिया था।
उनके अनुसार कई व्यवहार हमारी स्वाभाविक प्रवृत्तियों से प्रभावित होते हैं, भले ही हमें इसका एहसास न हो।
वर्तमान समय में स्वाभाविक होना क्यों ज़रूरी है?
आज की सोशल मीडिया वाली दुनिया में लोग अक्सर बनावटी छवि दिखाने लगते हैं।
ऐसे में स्वाभाविक होना एक बड़ी ताकत के साथ साथ संसाधन बन जाता है क्योंकि –लोगों का आप पर ट्रस्ट बनता हैं, रिश्ते में आपसी सौहार्द होता है।
मानसिक तनाव कम होता है। स्वयं में और सामने वाला का आपके प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है।
मनोविज्ञान में स्वाभाविक प्रकृति का क्या महत्व है ?
मनोविज्ञान के अनुसार हर व्यक्ति कुछ न कुछ प्राकृतिक प्रवृत्तियों के साथ जन्म लेता है।
जैसे – जिज्ञासा ,डर, अपनापन, आत्मरक्षा की भावना
उदाहरण के लिए, Sigmund Freud ने मानव प्रवृत्तियों को समझने में अवचेतन मन (unconscious mind) की भूमिका पर ज़ोर दिया था।
उनके अनुसार कई व्यवहार हमारी स्वाभाविक प्रवृत्तियों से प्रभावित होते हैं,
भले ही हमें इसका एहसास न हो।ऐसे में जब हम स्वमूल्यांकन करते हैं तब हमें पता चलता है।
मनोविज्ञान में स्वाभाविक प्रकृति का क्या महत्व है ।
वर्तमान समय में स्वाभाविक होना क्यों ज़रूरी है?
आज की सोशल मीडिया वाली दुनिया में लोग अक्सर बनावटी छवि दिखाने लगते हैं।
ऐसे में स्वाभाविक होना एक बड़ी ताकत के साथ साथ संसाधन बन जाता है क्योंकि –लोगों का आप पर ट्रस्ट बनता हैं, रिश्ते में आपसी सौहार्द होता है।
मानसिक तनाव कम होता है। स्वयं में और सामने वाला का आपके प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है।
निष्कर्ष: स्वाभाविकता जीवन को आसान बनाता है ।
जब हम अपनी प्रकृति के विरुद्ध जाकर काम करते हैं, तभी जीवन में तनाव और असंतुलन पैदा होता है।
इसलिए, सफल जीवन का मंत्र यही है कि हम अपने “स्व” के भाव को पहचानें और स्वाभाविक जिएं।
स्वाभाविक व्यवहार या चीज की कार्यसूची बनाकर जब हम समझते हैं कि कुछ चीजें स्वाभाविक हैं, तो हम उन पर अनावश्यक दोषारोपण या संघर्ष कम कर देते हैं।
इसी तरह स्वाभाविक प्रवृत्ति को पहचानकर हम अपने और दूसरों के व्यवहार को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं – चाहे वह माता-पिता की संतान-रक्षा की प्रवृत्ति हो या किसी व्यक्ति का स्वार्थ की ओर झुकाव।
लेकिन महत्वपूर्ण बात: स्वाभाविक होने का मतलब “सही” होना नहीं है।
कई स्वाभाविक प्रवृत्तियाँ (जैसे अत्यधिक क्रोध या भय) आधुनिक जीवन में हानिकारक साबित हो सकती हैं।
इसलिए दृढ़ संकल्प,बुद्धि और विवेक से इन्हें नियंत्रित करना ही सभ्यता और व्यक्तिगत विकास का आधार है।
मन मैला तन ऊजरा, बगुला कपटी अंग।
तासों तो कौवा भला , तन मन एकहिं अंग।
कबीर कहते हैं कि अपनी कमियों के साथ ‘असली’ (Genuine) रहना उस ‘झूठी अच्छाई’ से बेहतर है जो केवल दूसरों को ठगने के लिए पहनी गई हो।
आज की बनावटी और दिखावटी दुनिया में स्वाभाविक प्रवृत्ति का होना ही सबसे बड़ा गुण है। जैसे हो, वैसे ही रहो; स्वाभाविक रहो ,दोहरा मत बनो।
क्या आपने कभी महसूस किया है कि कोई प्रतिक्रिया “कर दिया” बिना सोचे समझे ?
वह स्वाभाविक प्रवृत्ति का काम था। इसे जानना हमें खुद को और बेहतर समझने में मदद करता है।
मनोविज्ञान में स्वाभाविक प्रकृति का क्या महत्व है ?
मनोविज्ञान के अनुसार हर व्यक्ति कुछ न कुछ प्राकृतिक प्रवृत्तियों के साथ जन्म लेता है।
जैसे – जिज्ञासा ,डर, अपनापन, आत्मरक्षा की भावना
उदाहरण के लिए, Sigmund Freud ने मानव प्रवृत्तियों को समझने में अवचेतन मन (unconscious mind) की भूमिका पर ज़ोर दिया था।
उनके अनुसार कई व्यवहार हमारी स्वाभाविक प्रवृत्तियों से प्रभावित होते हैं, भले ही हमें इसका एहसास न हो।
ऐसे में जब हम स्वमूल्यांकन करते हैं तब हमें पता चलता है। मनोविज्ञान में स्वाभाविक प्रकृति का क्या महत्व है ।
वर्तमान समय में स्वाभाविक होना क्यों ज़रूरी है?
आज की सोशल मीडिया वाली दुनिया में लोग अक्सर बनावटी छवि दिखाने लगते हैं।
ऐसे में स्वाभाविक होना एक बड़ी ताकत के साथ साथ संसाधन बन जाता है क्योंकि –लोगों का आप पर ट्रस्ट बनता हैं, रिश्ते में आपसी सौहार्द होता है।
मानसिक तनाव कम होता है। स्वयं में और सामने वाला का आपके प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है।
स्वाभाविक का अर्थ क्या है ?
कोई भी ऐसी क्रिया या स्थिति जो बाहरी दबाव, लालच या डर के बिना,जिसमे अनुशासन की आवश्यकता नहीं बल्कि व्यक्ति के अंतर्मन से स्वतः स्फूर्त होती है, उसे ‘स्वाभाविक’ कहा जाता है।
उदाहरण: 1.जैसे पानी का स्वभाव शीतल होना है और अग्नि का स्वभाव उष्ण (गर्म) होना है। वैसे ही मनुष्य का बिना किसी प्रयास के खुश होना या करुणा या दया दिखाना उसका स्वाभाविक गुण है।
स्वाभाविक प्रवृति का अर्थ क्या है ?
मनोवैज्ञानिक अर्थ: यह एक ऐसी जन्मजात प्रेरणा है जो हमें किसी विशेष परिस्थिति में एक निश्चित तरीके से प्रतिक्रिया करने के लिए मजबूर करती है।
इसके लिए हमें किसी शिक्षा या ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती।
तथ्य: इसे ‘Biological Programming’ भी कह सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई खतरा सामने आता है, तो बिना सोचे-समझे भागना या मुकाबला करना (Fight or Flight) हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति है।
स्वाभाविक प्रव्रृति का अर्थ या मतलब किसी व्यक्ति या जीव के अंदर जन्म से या स्वभाव से मौजूद प्राकृतिक झुकाव या आदत।