अस्तित्व का अर्थ: व्यक्तिगत खोज से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तक

परिचय – क्या हम अपने अस्तित्व का अर्थ जानते हैं ?

क्या हम अपने जीवन के अस्तित्व का अर्थ के बारे में जानते हैं या हम सबके अस्तित्व का कोई गहरा उद्देश्य है ? 

वास्तव में जब हम अस्तित्व का अर्थ को गहराई से समझ पाते हैं तभी हमें पता चलता है कि जीवन केवल व्यक्तिगत यात्रा नहीं बल्कि यह शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की नींव से जुड कर आगे बढ़ता है।

क्या हम सच में जानते हैं कि हमारे जीवन के अस्तित्व का क्या उद्देश्य है?
अस्तित्व को समझना मतलब अपनी जड़ों, अपनी चेतना और अपने उद्देश्य को समझना। यह लेख आपको अस्तित्व के हर पहलू को सरल भाषा में समझाएगा।


अस्तित्व का अर्थ (Meaning of Existence)

अस्तित्व = होना, विद्यमान होना, जो है वही अस्तित्व है।अस्तित्व शब्द का मूल अस धातु से बना है जिसका अर्थ होना, विद्यमान होना ये मानसिक,भावनात्मक और भौतिक अवस्था में हो सकता है।

अस्तित्व का अर्थ

अस्तित्व का अर्थ सिर्फ जीवित रहना नहीं है बल्कि वह सब कुछ जो साकार या निराकार  रूप अर्थात जिसे हम भौतिक रूप में देख नहीं सकते परन्तु शारीरिक स्पर्श ,गंध और चेतना के स्तर पर महसूस कर सकते हैं । अस्तित्व कहलाता है 

अस्तित्व का अर्थ सीधे शब्दों में – सब अस्तित्व हैं।
जैसे— पत्थर, जल, वायु, मनुष्य, विचार, चेतना।

यह केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि हर वह चीज़ जो—

  • दिखे या न दिखे
  • छू सकें या महसूस कर सकें
  • भौतिक हो या चेतन

अस्तित्व का मतलब

अस्तित्व का मतलब है —

  • खुद को पहचानना
  • खुद में उल्लेखनीय परिवर्तन करना
  • परिपक्व होना
  • स्वयं को अनंत रूप से विस्तृत करना
  • खुद में परिवर्तित करना, परिवर्तन का अर्थ है परिपक्व होना, परिपक्व होने का अर्थ है अनुशासन के महत्व को समझना और अपने आपको अनंत रूप से विस्तृत करना 

अस्तित्व का पर्यायवाची

  • मौजूदगी
  • विद्यमानता
  • हकीकत
  • उपस्थिति
  • वजूद

ये सभी शब्द अस्तित्व के अवधारणा से मिलते जुलते हैं जो होने की स्थिति या वास्तविक होने की अवस्था को दर्शाते हैं।

अस्तित्व का संधि-विच्छेद

अस्तित्व = अस् + तित्व

  • अस् = होना
  • तित्व = होने की अवस्था
    अर्थ: विद्यमान रहने की स्थिति

“अस्” का मतलब  होना या रहना (यह संस्कृत धातु “अस्” से बना है, जिसका अर्थ है “होना” या “विद्यमान होना”) ।

“तित्व” = होने की अवस्था या गुण को प्रदर्शित करना ।

इस प्रकार “अस्” + “तित्व” से मिलकर बना शब्द “अस्तित्व” का अर्थ है –  होने की अवस्था, विद्यमानता या जीवन का होना।

संस्कृत में अर्थ: अस्तित्व अर्थात होने की अवस्था / विद्यमान रहने की स्थिति।

अस्तित्व’ वह सत्य है जो स्वयं में अवस्थित है — जिसे नकारा नहीं जा सकता, चाहे वह दृश्य हो या अदृश्य, भौतिक हो या चेतन। 

अस्तित्व की परिभाषा

1. डेसकार्ट

“I think, therefore I am.” (मैं सोचता हूँ, इसलिए मैं हूँ), 
मतलब जो यह दर्शाता है कि चेतना ही अस्तित्व का प्रमाण है।

2. आधुनिक विज्ञान

आधुनिक विज्ञान के अनुसार भी, ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, केवल रूप बदलती है — यह तथ्य भी अस्तित्व की निरंतरता को सिद्ध करता है।

जैसे जल भाप या बर्फ बनकर भी ‘जल’ ही रहता है, वैसे ही अस्तित्व विभिन्न रूपों में परिवर्तित होते हुए भी कभी समाप्त नहीं होता।

ऊर्जा नष्ट नहीं होती, रूप केवल बदलता है।
जैसे जल → भाप → बर्फ → जल
रूप बदला, अस्तित्व नहीं।

इस प्रकार, अस्तित्व केवल भौतिक अस्तित्व  का विषय नहीं है, बल्कि वह अनंत चेतना है जो सृष्टि के प्रत्येक कण में विद्यमान है।

3. जीन पाल सार्त्र

अस्तित्व का परिभाषा –

जीन पाल सार्त्र के अनुसार अस्तित्व मानव के लिए कोई पूर्व-निर्धारित “मानव प्रकृति” नहीं होती।

यदि कोई व्यक्ति उम्र भर एक शिक्षक के रूप में कार्य करता है, तो उसने अपनी इच्छा  से उस भूमिका को चुना है

, क्योंकि खुद को इसके लिए दृढ संकल्पित कर लिया है।

और यही उसका अस्तित्व बन जाता है।

वह पहले मौजूद था, फिर उसने खुद को शिक्षक के रूप में ढाल लिया अर्थात अपनी मौजूदगी को विस्तृत किया। 

मनुष्य पहले मौजूद होता है, फिर अपनी भूमिका खुद चुनता है।

सेंट थॉमस एक्विनास के अनुसार अस्तित्व वह तथ्य है कि वह चीज वास्तव में मौजूद है जैसे फीनिक्स पक्षी की  राख से पुनर्जन्म तक की कहानी को समझ सकते हैं। 

4. रसेल व फ्रेगे

गोटलोब फ्रेगे और बर्ट्रेंड रसेल के अनुसार अस्तित्व  किसी व्यक्तिगत वस्तु का गुण नहीं है बल्कि यह गुणों का गुण है। कि

जब कोई कहता है कि “बिल गेट्स विद्यमान हैं,” तो वह केवल यह साबित कर रहा है कि ‘बिल गेट्स’ नाम के अनुरूप कम से कम एक चीज़ है, न कि यह कि बिल गेट्स का अस्तित्व उनकी ऊँचाई या रंग जैसा कोई गुण है।

अस्तित्व कोई गुण नहीं है;
कहना कि “फलाँ व्यक्ति मौजूद है” — यह बताता है कि उसका नाम किसी एक वास्तविक व्यक्ति से मेल खाता है।


अस्तित्व के प्रकार

ग्रीक दार्शनिक प्लेटोके अनुसार अस्तित्व के दो प्रकार हैं  

1. भौतिक अस्तित्व (Physical Existence)

भौतिक अस्तित्व क्या है ? -भौतिक अस्तित्व वह है जिसे इंद्रियों से देखा या छुआ जा सकता है — जैसे पृथ्वी, जल, वृक्ष, मानव शरीर आदि। 

2. विचारों का अस्तित्व (Ideal Existence)

दूसरा विचारों की दुनिया का अस्तित्व, जो शाश्वत और अपरिवर्तनीय है। उदाहरण के लिए, ‘पेड़’ का भौतिक रूप नष्ट हो सकता है, पर उसका विचार या स्वरूप सदा बना रहता है।

इस प्रकार, अस्तित्व के प्रकार केवल वस्तुओं के रूप में नहीं, बल्कि चेतना, विचार और सत्य के विभिन्न स्तरों में विद्यमान होते हैं।

जो दिखाई नहीं देता पर विद्यमान रहता है—
सत्य, न्याय, प्रेम, चेतना।


सामाजिक अस्तित्व क्या है?

कोई व्यक्ति भी जब अपनी जरूरत की पूर्ति के लिए या दूसरे के जरूरत के पूर्ति के लिए अन्य व्यक्ति से सहयोग लेता है या सहयोग करता है 

        दूसरे शब्दों में कोई व्यक्ति अकेले नहीं बल्कि परिवार, मित्रों, समुदाय, संस्कृति, और परंपराओं से जुड़कर जीता है, तो उसे सामाजिक अस्तित्व कहा जाता है। 

         सामाजिक अस्तित्व यह बताता है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जो समाज में रहकर, दूसरों के साथ संबंध बनाकर, उनकी भावनाओं और नियमों को समझकर ही अपना जीवन पूर्ण करता है।

मनुष्य अकेला नहीं जी सकता।
वह परिवार, समाज, संस्कृति और सहयोग पर आधारित है।

सामाजिक अस्तित्व = दूसरों के साथ मिलकर जीना।

उदाहरण कहानी – “प्रिंस और पुल”

गाँव का युवक प्रिंस शहर जा सकता था, पर उसने सोचा—
“मेरे जाने के बाद गाँव की समस्या कौन सुलझाएगा?”

एक छोटे से गाँव में प्रिंस  नाम का युवक रहता था। 

वह पढ़ा-लिखा था और शहर जाकर नौकरी करना चाहता था। 

पर गाँव में एक समस्या थी—नदी पर कोई पुल नहीं था। बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे और बुजुर्ग लोग अस्पताल तक नहीं पहुँच पाते थे।

प्रिंस ने सोचा — “मैं तो शहर चला जाऊँगा, पर गाँव वाले यूँ ही परेशान रहेंगे।”

फिर उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर गाँव वालों से चंदा इकट्ठा किया, सरकार से मदद ली और गाँव में एक मजबूत पुल बनवाया।

कई महीनों बाद जब पुल तैयार हुआ, तो पूरा गाँव प्रिंस के दृढ संकल्प के चमत्कार को देखा और उसका नाम सम्मान से लेने लगा। गाँव के बच्चों के चेहरे पर मुस्कान थी क्योंकि अब वे स्कूल जा सकते थे।

उसने गाँव वालों के साथ मिलकर नदी पर पुल बनवाया।
तो
अब बच्चे स्कूल जाते हैं, बुजुर्ग अस्पताल पहुँचते हैं।

यही सामाजिक अस्तित्व है— हम दूसरों से जुड़े बिना पूर्ण नहीं।


सह-अस्तित्व का अर्थ (Co-existence)

सह-अस्तित्व का अर्थ है —  व्यक्ति का सभी जीवों, मनुष्यों, और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्वक रहना।

यह मात्र मनुष्य – मनुष्य के साथ संबंध तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य और पर्यावरण, पशु-पक्षी, वृक्षों, नदियों आदि सभी के बीच संतुलन बनाए रखना इसका मूल भाव है।

 सह-अस्तित्व यह बताता है कि जीवन तभी स्थायी और सुखद होता है जब सभी का अस्तित्व एक-दूसरे पर आधारित , सामंजस्यपूर्ण और सहयोगी हो।

सह-अस्तित्व = प्रकृति, मनुष्य, पशु-पक्षी और पर्यावरण के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन।

  • सहयोग
  • संतुलन
  • पारस्परिक सम्मान
  • प्रकृति के साथ समन्वय

व्यक्तिगत अस्तित्व से सह-अस्तित्व तक की यात्रा

  1. हम अपने आप को पहचानते हैं
  2. हम अपने अस्तित्व के उद्देश्य समझते हैं
  3. हम समाज से सह-अस्तित्व के माध्यम से जुड़ते हैं
  4. और अंत में समझते हैं कि—
    जीवन शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में ही सार्थक है।

अस्तित्व का आनंद कैसे लें?

  • अस्तित्व का अर्थ जानने का मतलब खुद को जानें
  • किसी भी कार्य को इतना लीन होकर करें मानो आप प्रकृति में डूबें हैं
  • इस पृथ्वी पर जितने भी व्यक्ति ,जीव जंतु , समाज और वस्तु से किसी न किसी रूप एक रिश्ता होता है उनसे जुड़कर ही हम किसी कार्य को पूरा करते हैं।
  • चूँकि रिश्ते मानव जीवन के जरूरी अंग हैं इसलिए रिश्तों को संजोएँ और अपने अस्तित्व का आनंद उठायें।
  • संतुलन बनाएँ- जीवन में आप जितना प्रकृति, लोग ,समाज, जीव जंतु के साथ बेहतर सामंजस्य बौर संतुलन बनाते हैं उतना ही आंतरिक ख़ुशी और जीने का आनंद मिलेगा।

निष्कर्ष

अस्तित्व का अर्थ केवल “होना” नहीं है,
यह विकास, चेतना, सहयोग और प्रकृति के संतुलन का नाम है।
अस्तित्व का सही अर्थ है—
खुद को जानना और सभी के साथ सामंजस्य से जीना।

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